Sunday, January 29, 2023

बॉलीवुड में बनायीं अपनी जगह आयुष्मान खुराना ने इस मूवी से 'An Action Hero'

An Action Hero फ़िल्म का रिव्यु हिंदी में.



सार
फिल्म ‘एन एक्शन हीरो’ एक तरह से आयुष्मान खुराना के लिए एक सबक है और ये सबक शायद उन्होंने इस फिल्म को शुरू करने से पहले ही सीख लिया। जैसे कि क्रिकेट टीम में होता है कि एक बल्लेबाज अगर न चले तो दूसरा, तीसरा या चौथा आकर पारी संभाल सकता है। सिनेमा भी कुछ कुछ वैसा ही है।


विस्तार

आयुष्मान खुराना का वैसे तो नाम ही काफी है, किसी हिंदी फिल्म की एक अलग पहचान के लिए। लेकिन, समाज में वर्जित विषयों पर लगातार फिल्में करते रहे आयुष्मान ने अपनी एक जैसी फिल्मों की लीक छोड़कर इस बार एक संपूर्ण मनोरंजक फिल्म की है। नाम भी एकदम बॉलीवुड टाइप है, ‘एन एक्शन हीरो’। आयुष्मान के सिनेमा पर अगर गौर से नजर डालें तो समझ आता है कि जब तक वह सिर्फ एक साधारण अभिनेता बने रहे, उनकी फिल्में कामयाब होती रहीं। लेकिन, जब उन्होंने ‘आयुष्मान खुराना टाइप’ फिल्में करनी शुरू की, तो ‘गुलाबो सिताबो’, ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ और ‘अनेक’ बनीं और उनके प्रशंसकों को पसंद नहीं आईं। इस बार उन्होंने हिंदी सिनेमा के 70 और 80 दशक के तेवर की फिल्म की है। फुलटू मसाला फिल्म। हीरो और विलेन की आमने सामने की भिड़ंत। खूब गुत्थमगुत्था वाले सीन और हैं कम से कम दो उत्तेजक आइटम नंबर, जिनके बारे में थोड़ा रुककर बात करते हैं।



बैकफुट पर नजर आए आयुष्मान खुराना

आयुष्मान खुराना को हिंदी सिनेमा में अभी लंबी पारी खेलनी है। अच्छा ही है कि फिल्म ‘एन एक्शन हीरो’ में वह चौके छक्के लगाने की बजाय थोड़ा सधी हुई एक्टिंग करते दिखे। हालांकि, जो वह इस फिल्म मे कर रहे हैं, वह उनके अब तक के सिनेमा को देखने वालों के लिए हैरानी मे डालता है लेकिन इसी में इस किरदार की जीत है। आयुष्मान ने इतने नकचढ़े इंसान का किरदार पहले किया नहीं है तो शुरू शुरू में थोड़ा अटपटा भी लगता है। परदे की अपनी शख्सीयत को अपनी निजी जिंदगी में लाते समय कहीं कुछ खटकता है पर अनिरुद्ध ने कहानी में इतने जंप कट्स रखे हैं कि मामला बिगड़ने से पहले ही संभल जाता है। एक किरदार फिल्म में जितेंदर हुड्डा ने भी निभाया है, कम देरी के लिए आए इस कलाकार पर हिंदी फिल्मकारों को अभी से नजर रखने की जरूरत है। मौका मिला तो जितेंदर लंबे रोल में भी कमाल दिखा सकते

गानों ने खराब किया फिल्म का मजा

बिना हीरोइन की फिल्म का मजा हालांकि ‘एन एक्शन हीरो’ में डाले गए रीमिक्स गाने खराब करते हैं और ये कुछ कुछ वैसा ही है जैसा फिल्म ‘विक्रम वेधा’ के साथ हुआ। ऋतिक रोशन की एक एक्शन फिल्म की उम्मीद लगाए बैठे दर्शक फिल्म का पहला गाना ‘अल्कोहोलिया’ देखते ही निराश हो गए। फिल्म को लेकर बनी हाइप का पूरा बुलबुला इस एक गाने ने फोड़ दिया। फिल्म ‘एन एक्शन हीरो’ को देखने की उत्सुकता कम करने के गुनहगार फिल्म की रिलीज से पहले जारी किए गए इसके दोनों गाने ‘जेडा नशा’ और ‘आप जैसा कोई मेरी जिंदगी में आए’ हैं। अनिरुद्ध की शायद फिल्म के निर्माताओं के सामने चली नहीं और इसके लिए उन्होंने भी हथियार डाल ही दिए होंगे। बिना गानों की ये एक बेहतरीन फिल्म हो सकती थी।


दमदार तकनीकी टीम का शानदार काम


इन खामियों के बावजूद फिल्म को संवारने में नीरज यादव के लिखे चुटीले संवाद, कौशल शाह की बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी, निनाद खानोलकर की चुस्त एडिटिंग और माणिक बत्रा की कमाल की साउंड डिजाइन बहुत मदद करती है। अनिरुद्ध ने अपनी तकनीकी टीम बेहतरीन चुनी है और इसीलिए उनकी फिल्म देखने का आनंद भी आखिर तक बना रहता है। आनंद एल राय के चहेते हीरो का स्पेशल अपीयरेंस फिल्म का पैसा वसूल लम्हा है। फिल्म ‘एन एक्शन हीरो’ एक तरह से देखा जाए तो जयदीप अहलावत की फिल्म है। अगर आप इस अभिनेता के प्रशंसक रहे हैं तो फिल्म देखने का मजा और आएगा। हां, जयदीप के लिए ये सोचने वाली बात है कि वह एक ही बोली को लगातार पर्दे पर बोलकर कहीं अपने आसपास अभिनय की लक्ष्मण रेखा तो नहीं खींच रहे


फिल्म में चलती फिल्म की कहानी
लंबे समय तक अपने सहायक रहे अनिरुद्ध अय्यर पर निर्माता आनंद एल राय ने फिल्म ‘एन एक्शन हीरो’ में दांव खेला है और अपनी पहली फिल्म बना रहे अनिरुद्ध अपनी काबिलियत साबित करने में सफल भी रहे हैं। फिल्म में चलती फिल्म वाली इस कहानी का हीरो मानव है। सुपरस्टार है। उसका अपना स्वैग है। परदे पर भी और निजी जिंदगी में भी। उसके सेट पर एक हादसा होता है। जो मरा है, वह हरियाणा के एक अक्खड़ नेता का भाई था। मामला कैणा तब होता है जब ये नेता अपने भाई की मौत का बदला लेने हीरो के पीछे पीछे लंदन पहुंच जाता है। कोरोना काल में बनी ज्यादातर फिल्में भारत के बाहर ही शूट हुईं क्योंकि वहां पाबंदियां थोड़ी कम थीं। ‘एन एक्शन हीरो’ भी उसी काल खंड में बनी फिल्म है और उन दिक्कतों को देखते हुए अनिरुद्ध ने अपनी कोशिशों में काफी हद तक सफलता पाई है।




अनिरुद्ध अय्यर का अच्छा डेब्यू
फिल्म ‘एन एक्शन हीरो’ एक तरह से आयुष्मान खुराना के लिए एक सबक है और ये सबक शायद उन्होंने इस फिल्म को शुरू करने से पहले ही सीख लिया। जैसे कि क्रिकेट टीम में होता है कि एक बल्लेबाज अगर न चले तो दूसरा, तीसरा या चौथा आकर पारी संभाल सकता है। सिनेमा भी कुछ कुछ वैसा ही है। अगर एक फिल्म में हीरो के साथ दमदार विलेन हो, मादक हीरोइन हो, चहकते फुदकते कुछ साथी कलाकार हों तो दर्शक का ध्यान किसी एक किरदार के ही पोस्टमार्टम पर टिक नहीं पाता है। अनिरुद्ध की ये होशियारी यहां काम आई है। वह आनंद एल राय के शागिर्द हैं लेकिन सिनेमा उनका खालिस अपना है। कहीं से भी उनके निर्देशन पर अपने मेंटॉर की छाप नहीं दिखती। अनिरुद्ध की तारीफ इसलिए भी करनी होगी क्योंकि अपनी पहली ही फिल्म में वह एक ऐसी कहानी के लिए आयुष्मान को राजी करने में सफल रहे जिसमें उनके साथ कोई हीरोइन नहीं है।


Saturday, January 28, 2023

Pathaan Film Review "कुर्सी की पेटी बाँध लो मौसम"

एक लंबे अरसे बाद देश के सिनेमाघरों का नजारा बदला हुआ है। मॉर्निंग शोज में पुलिस के चाक-चौबंद बंदोबस्त के बीच Shahrukh Khan-Salman Khan के फैंस का क्रेज सिर चढ़ कर बोल रहा था। जी हां, थिएटर्स की रौनक ऐसी थी, मानो कोई त्योहार हो। गुलाबी ठंड के बीच फैंस काफी तरोताजा और तैयार होकर आए थे अपने फेवरेट स्टार्स की फिल्म देखने। बादशाह खान पूरे चार साल बाद सिल्वर स्क्रीन पर कमबैक कर रहे हैं और ये मौका उनके फैंस के लिए किसी सेलिब्रेशन से कम नहीं था। उस पर सोने पे सुहागा ये कि 'Pathaan' फैंस के लिए हाई ऑक्टेन एक्शन और एंटरटेनमेंट के साथ सलमान खान की मौजूदगी बूस्टर डोज साबित हुई है। ये कहने में कोई गुरेज नहीं कि यशराज की स्पाय यूनिवर्स की इस फिल्म का रोंगटे खड़े कर देनेवाला एक्शन अब तक हिंदी फिल्मों में देखने को नहीं मिला है।





'पठान' की कहानी

फिल्‍म की कहानी देशभक्ति के फॉर्मूले से लबरेज है। कश्मीर में अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया गया है। इस फैसले से पाकिस्तान तिलमिला जाता है। वह भारत के इस निर्णय पर उसे सबक सिखाने के लिए 'आउटफिट एक्स' नामक एक ऐसे आतंकी गिरोह का सहारा लेता है, जिसका सरगना जिम (जॉन अब्राहम) एक समय में रॉ का जांबाज और देशभक्त एजेंट हुआ करता था। मगर एक मिशन में उसकी गर्भवती पत्नी को उसी के सामने क्रूरता से मार दिया जाता। देश हाथ पर हाथ दिए बैठा रहता है और यहीं से जिम के अंदर देश के लिए नफरत और प्रतिशोध की भावना प्रबल हो जाती है। वह देश के दुश्मनों के साथ मिलकर अपने ही देश को तहस-नहस करने पर आमादा हो जाता है।

इस विकट स्थिति का सामना करने के लिए इंडियन इंटेलिजेंस फोर्स की मुखिया नंदिनी (डिंपल कपाड़िया) और फोर्स के हेड कर्नल लूथरा (आशुतोष राणा) अपने सबसे काबिल एजेंट पठान और उसकी टीम को नियुक्त करते हैं। जिम को पकड़कर उसके इरादों का पता लगाने के इस मिशन पर पठान की मुलाकात आईएसआई की एजेंट रुबाई (दीपिका पादुकोण) से होती है। जिम का उद्देश्‍य अगर विंध्वस का है, तो पठान का एक ही मकसद है अपने देश को बचाना, मगर रुबाई इन दोनों नायक और खलनायक के बीच एक ऐसा सूत्र साबित होती हैं, जो विश्वास और विश्वासघात की पतली सी थिन लाइन के बीच खड़ी है।

भारत और पाकिस्तान के दो एजेंटों की लव स्टोरी ‘टाइगर’ सीरीज की फिल्मों में दिखाई जा चुकी है। यहां पठान और रुबाई का भी लव एंगल बनता है। रुबाई पठान का साथ देगी या उसके साथ धोखा करेगी? क्‍या जिम अपने काले कारनामों में कामयाब हो पाएगा? देश की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने वाला पठान क्या देश को बचा पाता है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।




इन दोनों नायक और खलनायक के बीच एक ऐसा सूत्र साबित होती हैं, जो विश्वास और विश्वासघात की पतली सी थिन लाइन के बीच खड़ी है।

भारत और पाकिस्तान के दो एजेंटों की लव स्टोरी ‘टाइगर’ सीरीज की फिल्मों में दिखाई जा चुकी है। यहां पठान और रुबाई का भी लव एंगल बनता है। रुबाई पठान का साथ देगी या उसके साथ धोखा करेगी? क्‍या जिम अपने काले कारनामों में कामयाब हो पाएगा? देश की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने वाला पठान क्या देश को बचा पाता है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

'पठान' का रिव्‍यू

पठान के निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने करियर की शुरुआत 'हम तुम', 'सलाम नमस्ते' जैसी रोमांटिक फिल्मों से की, मगर 'बैंग बैंग' और 'वॉर' के बाद वे एक्शन फिल्मों की राह पर निकल पड़े। इसमें कोई दो राय नहीं कि 'पठान' तक आते-आते उन्होंने एक्शन की नई ऊंचाइयों को छुआ है। फिल्म की कहानी तो वही घिसी -पिटी है, जहां देशभक्त एजेंट अपने वतन को बचाने के लिए कटिबद्ध है, मगर एक्शन और स्पेशल इफेक्ट्स के मामले में सिद्धार्थ ने कोई कमी नहीं छोड़ी है। बॉलिवुड की इस मूवी में 'जेम्स बॉन्ड', 'मिशन इंपॉसिबल' और मार्वल की फिल्मों सरीखा इम्पैक्ट देखने को मिलता है।

सिदार्थ की यह फिल्म मसाला फिल्मों के पैमाने पर पूरी तरह से खरी उतरती है। फर्स्ट हाफ थोड़ा लंबा लगता है, मगर ओवर ऑल टर्न-ट्विस्ट, एक्सॉटिक लोकेशन, हीरो-विलेन के बीच शह और मात, चुटीले संवाद, कॉमिडी का तड़का जैसे एलिमेंट फिल्म के प्लस पॉइंट साबित होते हैं। एक्शन दृश्यों में बाइक चेजिंग, हेलिकॉप्टर की फाइट और पहाड़ी पर उड़ते ट्रेन के सीक्वेंस हैरतअंगेज बन पड़े हैं। फिल्म का मजबूत पक्ष इसका स्टाइलिस्ट वीएफएक्स, सिनेमैटोग्राफी, एक्शन सीक्वेंस और संगीत है। दुबई, पेरिस, अफगानिस्तान हो या अफ्रीका नयनाभिराम लोकेशंस को अलग अंदाज में नजर आते हैं। 'बेशरम रंग' और 'झूमे जो पठान' जैसे गाने पहले ही ब्लॉकबस्टर साबित हो चुके हैं। एक नोटिस करने वाली बात ये भी है कि किरदारों के लुक और कॉस्ट्यूम पर खासी मेहनत की गई है।

'पठान ' फ़िल्म का ट्रेलर




मूवी रिव्‍यू: पठान


'पठान' की कहानी

फिल्‍म की कहानी देशभक्ति के फॉर्मूले से लबरेज है। कश्मीर में अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया गया है। इस फैसले से पाकिस्तान तिलमिला जाता है। वह भारत के इस निर्णय पर उसे सबक सिखाने के लिए 'आउटफिट एक्स' नामक एक ऐसे आतंकी गिरोह का सहारा लेता है, जिसका सरगना जिम (जॉन अब्राहम) एक समय में रॉ का जांबाज और देशभक्त एजेंट हुआ करता था। मगर एक मिशन में उसकी गर्भवती पत्नी को उसी के सामने क्रूरता से मार दिया जाता। देश हाथ पर हाथ दिए बैठा रहता है और यहीं से जिम के अंदर देश के लिए नफरत और प्रतिशोध की भावना प्रबल हो जाती है। वह देश के दुश्मनों के साथ मिलकर अपने ही देश को तहस-नहस करने पर आमादा हो जाता है।

इस विकट स्थिति का सामना करने के लिए इंडियन इंटेलिजेंस फोर्स की मुखिया नंदिनी (डिंपल कपाड़िया) और फोर्स के हेड कर्नल लूथरा (आशुतोष राणा) अपने सबसे काबिल एजेंट पठान और उसकी टीम को नियुक्त करते हैं। जिम को पकड़कर उसके इरादों का पता लगाने के इस मिशन पर पठान की मुलाकात आईएसआई की एजेंट रुबाई (दीपिका पादुकोण) से होती है। जिम का उद्देश्‍य अगर विंध्वस का है, तो पठान का एक ही मकसद है अपने देश को बचाना, मगर रुबाई इन दोनों नायक और खलनायक के बीच एक ऐसा सूत्र साबित होती हैं, जो विश्वास और विश्वासघात की पतली सी थिन लाइन के बीच खड़ी है।

भारत और पाकिस्तान के दो एजेंटों की लव स्टोरी ‘टाइगर’ सीरीज की फिल्मों में दिखाई जा चुकी है। यहां पठान और रुबाई का भी लव एंगल बनता है। रुबाई पठान का साथ देगी या उसके साथ धोखा करेगी? क्‍या जिम अपने काले कारनामों में कामयाब हो पाएगा? देश की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने वाला पठान क्या देश को बचा पाता है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

'पठान' का रिव्‍यू

पठान के निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने करियर की शुरुआत 'हम तुम', 'सलाम नमस्ते' जैसी रोमांटिक फिल्मों से की, मगर 'बैंग बैंग' और 'वॉर' के बाद वे एक्शन फिल्मों की राह पर निकल पड़े। इसमें कोई दो राय नहीं कि 'पठान' तक आते-आते उन्होंने एक्शन की नई ऊंचाइयों को छुआ है। फिल्म की कहानी तो वही घिसी -पिटी है, जहां देशभक्त एजेंट अपने वतन को बचाने के लिए कटिबद्ध है, मगर एक्शन और स्पेशल इफेक्ट्स के मामले में सिद्धार्थ ने कोई कमी नहीं छोड़ी है। बॉलिवुड की इस मूवी में 'जेम्स बॉन्ड', 'मिशन इंपॉसिबल' और मार्वल की फिल्मों सरीखा इम्पैक्ट देखने को मिलता है।

सिदार्थ की यह फिल्म मसाला फिल्मों के पैमाने पर पूरी तरह से खरी उतरती है। फर्स्ट हाफ थोड़ा लंबा लगता है, मगर ओवर ऑल टर्न-ट्विस्ट, एक्सॉटिक लोकेशन, हीरो-विलेन के बीच शह और मात, चुटीले संवाद, कॉमिडी का तड़का जैसे एलिमेंट फिल्म के प्लस पॉइंट साबित होते हैं। एक्शन दृश्यों में बाइक चेजिंग, हेलिकॉप्टर की फाइट और पहाड़ी पर उड़ते ट्रेन के सीक्वेंस हैरतअंगेज बन पड़े हैं। फिल्म का मजबूत पक्ष इसका स्टाइलिस्ट वीएफएक्स, सिनेमैटोग्राफी, एक्शन सीक्वेंस और संगीत है। दुबई, पेरिस, अफगानिस्तान हो या अफ्रीका नयनाभिराम लोकेशंस को अलग अंदाज में नजर आते हैं। 'बेशरम रंग' और 'झूमे जो पठान' जैसे गाने पहले ही ब्लॉकबस्टर साबित हो चुके हैं। एक नोटिस करने वाली बात ये भी है कि किरदारों के लुक और कॉस्ट्यूम पर खासी मेहनत की गई है।

'पठान' का ट्रेलर

'पठान' में किंग खान अपने कमबैक को सही मायनों में सार्थक करते हैं। एसआरके का लुक हो, आंखों और बॉडी लैंग्वेज के जरिए की गई अदाकारी, एक्शन दृश्यों की चपलता, रोमांटिक गानों में उनका स्वैग और 'एक सोल्जर देश से ये नहीं पूछता कि देश ने उसके लिए क्या किया, वो पूछता है, वो देश के लिए क्या कर सकता है' जैसे डायलॉग दर्शकों को सीटी मारने और तालियां पीटने पर मजबूर कर देते हैं। यहां शाहरुख अपनी उम्र के अनुसार ही रोमांटिक होते हैं।

फिल्म का सरप्राइएज एलिमेंट हैं जिम के रूप में जॉन अब्राहम के किरदार की माउंटिंग। बॉलिवुड की फिल्मों में इतना मजबूत और वेल क्राफ्टेड विलेन कदाचित पहली बार देखने को मिल रहा है। उसे विलेन से कहीं भी कमतर नहीं दिखाया गया है, जॉन ने भी अपने किरदार में जान लगा दी है। 'टाइगर' यानी सलमान खान की 20 मिनट की एंट्री फिल्म को एक अलग लेवल पर ले जाती है। सलमान की मौजूदगी से फिल्म को बहुत फायदा मिला है। शाहरुख-सलमान की जुगलबंदी और एक्शन दर्शकों को दर्शक हाथों-हाथ लेते हैं।

दीपिका पादुकोण की मौजूदगी पर्दे पर करंट पैदा करती है। उन्होंने रुबाई जैसी स्पाइ गर्ल की विभिन्न परतों को खूबी से जिया है। बॉलिवुड हीरोइन को हीरो और विलेन के साथ एक्शन दृश्यों में कदमताल करते देखना अच्छा लगता है। डिंपल कपाड़िया और आशुतोष राणा ने अपनी भूमिकाओं में प्राण फूंकें हैं। सहयोगी कास्ट अच्छी है।

क्यों देखें- शाहरुख, सलमान और जॉन के चाहने वाले और एक्शन फिल्मों के शौकीनों के लिए ये मस्ट वॉच फिल्म है।

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