पठान कहानीgb(255, 92, 1); font-size: 18px; height: 3px; left: 0px; margin: 0px; padding: 0px; position: absolute; top: 38px; width: 50px;">
फिल्म की कहानी एक ऐसे टेरिरिस्ट गैंग से शुरू होती है, जो अटैक के लिए चार्ज लेते हैं और उनको इंडिया में ब्लास्ट करने का एक मिशन सौपा जाता है, इसके पीछे उनका कोई मकसद नहीं रहता है, वह पैसे लेकर इस काम को अंजाम देना शुरू करते हैं, इस जानकारी के पता लगते ही वनवास काट रहे पठान को बुलाया जाता, जो अपने देश को बचाने के लिए कुछ भी कर सकता है, यही इस फिल्म की कहानी का प्लाट है।
पठान के जरिए बॉलीवुड में कई नई-नई चीजें देखने को मिल रही हैं. अब यह पठान के घटिया और राजनीतिक कॉन्टेंट पर आई दर्शकों की उग्र प्रतिक्रिया को भोथरा करने का हथकंडा है या फिर किसी भी तरह शाहरुख खान को सुपरहिट बना लेने की जिद, कुछ तय नहीं कहा जा सकता. मगर भारतीय सिनेमा के इतिहास में पठान के पक्ष में मोर्चाबंदी जिस तरह नजर आ रही है- पहले कभी नजर नहीं आया था. आईचौक की याद में तो नहीं दिखता ऐसा कुछ. ट्रेलर-टीजर समेत पठान के तमाम विजुअल सामने आ चुके हैं. दर्शकों ने इसे औसत और घटिया कॉपी पेस्ट करार दिया है जो तमाम हॉलीवुड फिल्मों से चुराकर बनाई गई है. निर्माताओं को डर है कि उनकी फिल्म कहीं फ्लॉप ना हो जाए. इसके लिए तगड़ा माहौल बना रहे हैं. पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है.
शायद कोशिश है कि टिकट खिड़की पर किसी भी हालत में फिल्म को संतोषजनक स्टार्ट मिल जाए ताकि आने वाले वीकएंड और नॉर्मल वीकडेज में उसे जनादेश बताकर प्रचारित किया जाए और दर्शकों को सिनेमाघर आने के लिए ललचाया जाए. असल में शाहरुख के फैन क्लब की कोशिशें तो यही साबित करती हैं. शाहरुख के स्पेशल फैन क्लब ने पहले दिन पहले शो के लिए शाहरुख के 50 हजार प्रशंसकों को फिल्म सिनेमाघर लाने का फैसला लिया है. तमाम रिपोर्ट का कहना है कि फैन क्लब के प्रयास से पहले दिन के लिए 50 हजार टिकट बुक किए जाएंगे. टिकट बुक भी हो रहे हैं. 200 शहरों में फिल्म दिखाने का लक्ष्य है. फैन क्लब ने पठान की रिलीज पर देश के तमाम शहरों में जश्न का भी इंतजाम किया है. इसके तहत ढोल नगाड़े आदि बजाए जाएंगे और उनके विजुअल से सोशल मीडिया पर फिल्म के पक्ष में माहौल बनाया जाएगा. जैसे शाहरुख खान दी ग्रेट रजनीकांत हों.
पठान को लेकर जारी कवायदों से कई सवाल उठ रहे हैं? हालांकि फैन क्लब की कवायद से पठान को लेकर कई सारे स्वाभाविक सवाल उभर रहे हैं. पहला यही कि क्या पठान का कॉन्टेंट इतना कमजोर है कि निर्माताओं को अब फैन क्लब के जरिए एडवांस बुकिंग का सहारा लेना पड़ रहा है और दर्शक जुटाना पड़ रहा है. बताने की जरूरत नहीं कि एडवांस बुकिंग रिपोर्ट से भी फिल्मों के पक्ष में माहौल बनता है. दर्शकों की राय प्रभावित की जाती है. दर्शकों को लगता है कि जिस फिल्म की एडवांस बुकिंग हो रही है- उसमें देखने वाली कोई ना कोई बात जरूर होगी. खरबूजा इफेक्ट मान लीजिए. अब इस लिहाज से पठान की बुकिंग को लेकर कोई सही निष्कर्ष निकालना संभव ही नहीं. जब एडवांस बुकिंग ही स्वाभाविक नहीं है तो भला निष्कर्ष सटीक कैसे निकलेंगे. और कैसे मान लिया जाए कि पठान के पक्ष में माहौल बना ही हुआ है.
Controversy of Behsram Rang Song.
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